अमेरिका ने कसा शिकंजा, गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और जग्गू भगवानपुरिया के प्रत्यर्पण की तैयारी

'भारतीय जेलें नाकाफी हैं' - अमेरिका अब लॉरेंस बिश्नोई और जग्गू भगवानपुरिया को अपनी कस्टडी में लेने की तैयारी में, प्रत्यर्पण की मांग

Lawrence Bishnoi Extradition News: भारत की हाई-सिक्योरिटी जेलों में बंद कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और जग्गू भगवानपुरिया को लेकर अमेरिका ने एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है। अमेरिकी संघीय अभियोजकों (Federal Prosecutors) ने दावा किया है कि जेल के अंदर बंद होने के बावजूद ये गैंगस्टर दुनिया भर में अपना नेटवर्क चला रहे हैं, इसलिए अमेरिका अब इनके प्रत्यर्पण (Extradition) की मांग करेगा।

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और सुरक्षा जगत से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। अमेरिकी कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने भारत सरकार के सामने एक बड़ी मांग रखने का संकेत दिया है। अमेरिका का कहना है कि भारत की जेलें इन गैंगस्टरों की आपराधिक गतिविधियों को रोकने के लिए "पर्याप्त कदम नहीं उठा पा रही हैं", क्योंकि जेल की सलाखों के पीछे से भी ये सिंडिकेट तीन महाद्वीपों में हत्या, रंगदारी और ड्रग तस्करी जैसी वारदातों को अंजाम दे रहे हैं।

'Operation Hard Ball' के तहत अमेरिका का बड़ा एक्शन

लॉस एंजिल्स में अमेरिकी फेडरल अभियोजकों ने एक व्यापक अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई के तहत चार्जशीट (Indictments) सार्वजनिक की है, जिसे "ऑपरेशन हार्ड बॉल" (Operation Hard Ball) नाम दिया गया है। इस ऑपरेशन के तहत अमेरिका, कनाडा और यूरोप में फैले इस नेटवर्क के कुल 37 लोगों पर गंभीर आरोप तय किए गए हैं, जिनमें से 24 को गिरफ्तार भी किया जा चुका है।

अमेरिकी जांचकर्ताओं के मुताबिक, इस सिंडिकेट के पास से 1,000 किलोग्राम से अधिक नशीले पदार्थ और भारी मात्रा में अवैध हथियार जब्त किए गए हैं। इस पूरे नेटवर्क की कमान गुजरात की साबरमती जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई और असम की जेल में बंद जग्गू भगवानपुरिया के हाथों में होने का दावा किया गया है।

अमेरिकी अटॉर्नी का कड़ा रुख: 'हमारी जेलों में आकर रंगदारी बंद हो जाएगी'

लॉस एंजिल्स में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान फर्स्ट असिस्टेंट यूएस अटॉर्नी बिल एसायली (Bill Essayli) ने भारतीय जेलों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा, "इनमें से कुछ लोग पहले से ही भारत की जेलों में बंद हैं, इसलिए जाहिर है कि उनकी गतिविधियों को रोकने के लिए उतना ही काफी नहीं है।"

उन्होंने आगे कड़े लहजे में कहा, "जब वे संयुक्त राज्य अमेरिका की फेडरल जेल (Federal Penitentiary) में आएंगे, तो मैं आपको गारंटी देता हूं कि एक बार हमारी कस्टडी में आने के बाद वह किसी भी पीड़ित से रंगदारी नहीं वसूल पाएंगे। हम उन्हें बहुत लंबे समय तक अपनी कस्टडी में रखने की उम्मीद करते हैं।" अमेरिकी अधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि जग्गू भगवानपुरिया को आने वाले कुछ हफ्तों में अमेरिकी कस्टडी में लाया जा सकता है।

गोल्डी बराड़ पर $50,000 का इनाम और कनाडा का कनेक्शन

इसी चार्जशीट में एफबीआई (FBI) ने लॉरेंस बिश्नोई के सबसे करीबी और कनाडा-अमेरिका में छिपे गैंगस्टर गोल्डी बराड़ (Goldy Brar) की गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण के लिए 50,000 अमेरिकी डॉलर (लगभग 41 लाख रुपये) के इनाम की घोषणा की है।

रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) की डिप्टी कमिश्नर लीसा मोरलैंड ने भी पुष्टि की है कि अमेरिका द्वारा लगाए गए कड़े 'RICO' (रैकेटियर इन्फ्लुएंस्ड एंड करप्ट ऑर्गनाइजेशन) कानूनों के तहत अब बिश्नोई के भारत से औपचारिक प्रत्यर्पण का रास्ता साफ हो गया है।

जेल से कैसे चल रहा था वैश्विक नेटवर्क?

अमेरिकी अभियोजकों की ओर से दाखिल दस्तावेजों के अनुसार, लॉरेंस बिश्नोई जेल के अंदर स्मगल किए गए मोबाइल हैंडसेट और इंटरनेट वॉइस डिवाइस (VoIP) का इस्तेमाल करता था। इसके जरिए वह अमेरिका, कनाडा और यूरोप में भारतीय प्रवासियों (Diaspora Communities) को डराने, धमकाने, रंगदारी वसूलने और ड्रग कार्टेल के साथ मिलकर काम करने के निर्देश देता था।

भारत सरकार का क्या होगा अगला कदम?

भारत और अमेरिका के बीच साल 1997 में एक प्रत्यर्पण संधि (Extradition Treaty) साइन हुई थी, जो 1999 से लागू है। हालांकि, अमेरिका की ओर से किसी भी औपचारिक प्रत्यर्पण अनुरोध (Formal Request) पर आखिरी फैसला भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) और भारतीय अदालतों की समीक्षा के बाद ही होगा। राजनयिक और कानूनी तौर पर यह मामला आने वाले दिनों में भारत और अमेरिका के बीच एक बड़ा मोड़ ले सकता है।

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